Metals and NonMetals Notes PDF Download: हमारे दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली लगभग हर वस्तु—जैसे लोहे के बर्तन, ताँबे के तार, एल्युमिनियम के बर्तन, सोने-चाँदी के आभूषण, कोयला, सल्फर और ऑक्सीजन—कहीं न कहीं धातु एवं अधातु से संबंधित होती है। बिजली के तारों से लेकर खाना पकाने के बर्तनों तक और मोबाइल फोन से लेकर भवन निर्माण तक, धातु एवं अधातु हमारी जीवन-शैली का अभिन्न हिस्सा हैं।
इस लेख में आपको धातु एवं अधातु अध्याय के पूरे Notes सरल भाषा में, व्यवस्थित और परीक्षा-उपयोगी तरीके से मिलेंगे, ताकि विद्यार्थी इन्हें आसानी से समझ सकें, याद कर सकें और परीक्षा में आत्मविश्वास के साथ लिख सकें। यह लेख पूरी तरह NCERT आधारित है और विशेष रूप से बोर्ड परीक्षा की तैयारी को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
1. धातु एवं अधातु – परिचय (Metals and NonMetals Notes PDF Download)
तत्वों को उनके भौतिक एवं रासायनिक गुणों के आधार पर मुख्यतः धातु और अधातु में वर्गीकृत किया जाता है। हमारे दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली अधिकांश वस्तुएँ धातु या अधातु से बनी होती हैं।
| प्रकृति में पाए जाने वाले सभी तत्वों को उनके भौतिक एवं रासायनिक गुणों के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। इन्हीं गुणों के आधार पर तत्वों को मुख्य रूप से धातु और अधातु में बाँटा गया है। हमारे चारों ओर दिखाई देने वाली अधिकांश वस्तुएँ जैसे बर्तन, तार, मशीन, ईंधन, प्लास्टिक आदि धातु या अधातु से बने होते हैं। इसलिए धातु एवं अधातु का अध्ययन हमारे दैनिक जीवन और औद्योगिक उपयोग दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। |

2. धातुओं के भौतिक गुण (Physical Properties of Metals)
2.1 धात्विक चमक (Metallic Lustre)
धातुएँ सामान्यतः चमकदार होती हैं। इस गुण को धात्विक चमक कहते हैं।
👉 अपवाद: सोडियम, पोटैशियम जल्दी ऑक्सीकरण के कारण चमक खो देते हैं।
| धातुएँ सामान्यतः चमकदार होती हैं। जब प्रकाश धातु की सतह से परावर्तित होता है, तो वह चमक उत्पन्न करता है, जिसे धात्विक चमक कहते हैं। इसी कारण सोना, चाँदी और ताँबा आभूषण बनाने में उपयोग किए जाते हैं। 👉 अपवाद: सोडियम और पोटैशियम हवा के संपर्क में आते ही ऑक्सीकरण के कारण अपनी चमक खो देते हैं। |
2.2 आघातवर्ध्यता (Malleability)
धातुओं को पीटकर पतली चादर बनाई जा सकती है।
👉 सोना और चाँदी सबसे अधिक आघातवर्ध्य धातुएँ हैं।
| धातुओं को पीटकर पतली चादरों में बदला जा सकता है। इस गुण को आघातवर्ध्यता कहते हैं। सोना और चाँदी अत्यधिक आघातवर्ध्य धातुएँ हैं। 👉 1 ग्राम सोने से लगभग 1 वर्ग मीटर की पतली चादर बनाई जा सकती है। इसी कारण धातुओं से बर्तन और सजावटी वस्तुएँ बनाई जाती हैं। |
2.3 तन्यता (Ductility)
धातुओं को पतले तार के रूप में खींचा जा सकता है।
👉 1 ग्राम सोने से लगभग 2 km लंबा तार बनाया जा सकता है।
| धातुओं को खींचकर पतले तारों में बदला जा सकता है। इस गुण को तन्यता कहते हैं। 👉 सोना सबसे अधिक तन्य धातु है। इसी कारण ताँबा और एल्युमिनियम विद्युत तार बनाने में प्रयुक्त होते हैं। |
2.4 कठोरता
अधिकांश धातुएँ कठोर होती हैं।
👉 अपवाद: सोडियम और पोटैशियम मुलायम होते हैं, चाकू से काटे जा सकते हैं।
| अधिकांश धातुएँ कठोर होती हैं और आसानी से नहीं टूटतीं। 👉 अपवाद: सोडियम और पोटैशियम बहुत मुलायम होते हैं और चाकू से काटे जा सकते हैं। |
2.5 ऊष्मा एवं विद्युत चालकता
धातुएँ ऊष्मा और विद्युत की अच्छी चालक होती हैं।
👉 चाँदी और ताँबा सबसे अच्छे चालक हैं।
| धातुएँ ऊष्मा और विद्युत की अच्छी चालक होती हैं। 👉 चाँदी सबसे अच्छी विद्युत चालक है, परंतु महँगी होने के कारण ताँबे का अधिक उपयोग किया जाता है। |
2.6 ध्वनिकता (Sonorous)
धातुएँ कठोर सतह से टकराने पर ध्वनि उत्पन्न करती हैं।
👉 इसी कारण स्कूल की घंटी धातु की बनी होती है।
| धातुएँ जब किसी कठोर सतह से टकराती हैं, तो ध्वनि उत्पन्न करती हैं। इस गुण को ध्वनिकता कहते हैं। 👉 इसी कारण स्कूल की घंटी और मंदिर की घंटियाँ धातु की बनी होती हैं। |

3. अधातुओं के भौतिक गुण
- अधातुएँ सामान्यतः चमकदार नहीं होतीं
- न आघातवर्ध्य, न तन्य
- विद्युत और ऊष्मा की कुचालक
- ठोस, द्रव (ब्रोमीन) या गैस के रूप में पाई जाती हैं
👉 अपवाद:
- आयोडीन चमकीला होता है
- ग्रेफाइट (कार्बन का अपररूप) विद्युत चालक है
| अधातुएँ सामान्यतः धातुओं के विपरीत गुण प्रदर्शित करती हैं। ये न तो चमकदार होती हैं, न ही आघातवर्ध्य या तन्य। अधातुएँ ऊष्मा और विद्युत की कुचालक होती हैं। 👉 अधिकांश अधातुएँ गैस के रूप में पाई जाती हैं। 👉 अपवाद: आयोडीन चमकदार होता है ग्रेफाइट (कार्बन का अपररूप) विद्युत चालक है |

4. धातुओं के रासायनिक गुण
4.1 वायु में दहन
धातु + ऑक्सीजन → धातु ऑक्साइड
उदाहरण:
2Cu + O₂ → 2CuO
👉 अधिकांश धातु ऑक्साइड क्षारीय होते हैं।
धातुएँ ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके धातु ऑक्साइड बनाती हैं।2Cu + O₂ → 2CuOअधिकांश धातु ऑक्साइड क्षारीय होते हैं। कुछ ऑक्साइड जैसे एल्युमिनियम ऑक्साइड उभयधर्मी होते हैं। |
4.2 उभयधर्मी ऑक्साइड
कुछ धातु ऑक्साइड अम्ल और क्षार दोनों से अभिक्रिया करते हैं।
👉 Al₂O₃, ZnO
| जो ऑक्साइड अम्ल और क्षार दोनों से अभिक्रिया करते हैं, उन्हें उभयधर्मी ऑक्साइड कहते हैं। 👉 उदाहरण: Al₂O₃, ZnO |
5. धातुओं की जल के साथ अभिक्रिया
धातुओं की जल के साथ अभिक्रिया उनकी अभिक्रियाशीलता पर निर्भर करती है।
- K, Na → ठंडे जल से तीव्र अभिक्रिया
- Ca → धीमी अभिक्रिया
- Mg → गर्म जल से
- Al, Zn, Fe → भाप से
- Cu, Ag, Au → जल से अभिक्रिया नहीं
उदाहरण:
2Na + 2H₂O → 2NaOH + H₂ + ऊष्मा
6. धातुओं की अम्ल के साथ अभिक्रिया
धातु + तनु अम्ल → लवण + हाइड्रोजन गैस
उदाहरण:
Zn + 2HCl → ZnCl₂ + H₂
👉 नाइट्रिक अम्ल के साथ सामान्यतः H₂ गैस नहीं निकलती।
धातुएँ तनु अम्लों से अभिक्रिया करके लवण और हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करती हैं।Zn + 2HCl → ZnCl₂ + H₂ |

7. विस्थापन अभिक्रिया
जब कोई अधिक अभिक्रियाशील धातु, कम अभिक्रियाशील धातु को उसके लवण से बाहर निकाल देती है, तो इसे विस्थापन अभिक्रिया कहते हैं।
Fe + CuSO₄ → FeSO₄ + Cu
8. सक्रियता श्रेणी (Reactivity Series)
K > Na > Ca > Mg > Al > Zn > Fe > Pb > Cu > Hg > Ag > Au
👉 इसका उपयोग:
- धातु निष्कर्षण
- विस्थापन अभिक्रिया
- संक्षारण की रोकथाम
| धातुओं को उनकी अभिक्रियाशीलता के क्रम में रखने को सक्रियता श्रेणी कहते हैं। |
9. धातु एवं अधातु की अभिक्रिया – आयनिक यौगिक
धातु इलेक्ट्रॉन त्याग करती है
अधातु इलेक्ट्रॉन ग्रहण करती है
👉 इससे आयनिक यौगिक बनते हैं
उदाहरण: NaCl, MgCl₂
| धातु इलेक्ट्रॉन त्याग करती है और अधातु इलेक्ट्रॉन ग्रहण करती है। इस प्रक्रिया से आयन बनते हैं और आयनिक यौगिक बनते हैं। |
10. आयनिक यौगिकों के गुण
- ठोस व कठोर
- उच्च गलनांक
- जल में घुलनशील
- गलित या विलयन अवस्था में विद्युत चालक
| आयनिक यौगिक कठोर और ठोस होते हैं, उनका गलनांक अधिक होता है तथा ये गलित अवस्था या जलीय विलयन में विद्युत चालक होते हैं। |
11. धातुओं की प्राप्ति (Metals Extraction)
धातुओं को उनके अयस्कों से प्राप्त करने की प्रक्रिया को धातु निष्कर्षण कहते हैं।
11.1 अयस्क एवं खनिज
- खनिज: प्राकृतिक यौगिक
- अयस्क: जिनसे धातु निकालना लाभकारी हो
| अभिक्रियाशीलता के आधार पर धातुओं का निष्कर्षण अलग-अलग विधियों से किया जाता है। |
11.2 निष्कर्षण के प्रकार
- कम अभिक्रियाशील → केवल गर्म करना
- मध्यम → भर्जन / निस्तापन + अपचयन
- अधिक → विद्युत अपघटन
12. धातुओं का परिष्करण
धातुओं को शुद्ध करने की प्रमुख विधि:
👉 विद्युत अपघटनी परिष्करण
| अशुद्ध धातुओं को शुद्ध करने की प्रक्रिया को परिष्करण कहते हैं। सबसे सामान्य विधि विद्युत अपघटनी परिष्करण है। |
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| Chapter-2 Acids Bases and Salts / अम्ल, क्षारक एवं लवण | English Medium | Hindi Medium |